Navgrah Yantra on Bhojpatra 6*6 inch Sidh abhimantrit
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Description नवग्रह यंत्र के लाभ (Benefits of Navgrah Yantra): नवग्रह यंत्र नौ ग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु) का संतुलन बनाने वाला अत्यंत शक्तिशाली यंत्र है। इसके लाभ इस प्रकार हैं: ✅ 1. ग्रह दोषों का निवारण जन्म कुंडली में मौजूद ग्रह दोषों और पाप ग्रहों के प्रभाव को कम करता है। राहु, केतु, शनि साढ़ेसाती, ढैय्या और अन्य दोषों से राहत देता है। ✅ 2. जीवन में संतुलन और स्थिरता स्वास्थ्य, धन, करियर और रिश्तों में संतुलन लाता है। ग्रहों के अशुभ प्रभाव से उत्पन्न समस्याओं को कम करता है। ✅ 3. धन, समृद्धि और सफलता व्यापार में उन्नति और नौकरी में स्थिरता के लिए शुभ। आर्थिक तंगी और कर्ज से राहत दिलाने में सहायक। ✅ 4. मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा नकारात्मकता, भय और तनाव को दूर करता है। घर में शांति और सकारात्मक माहौल बनाता है। ✅ 5. संतान सुख और पारिवारिक सौहार्द दांपत्य जीवन में मधुरता और रिश्तों में सुधार करता है। संतान सुख और पारिवारिक खुशहाली में मदद करता है। ✅ 6. आध्यात्मिक प्रगति साधना और ध्यान में सहायक। ग्रहों की कृपा से सफलता और शक्ति प्राप्त होती है। सुझाव: नवग्रह यंत्र को शुभ मुहूर्त, शनिवार, या नवरात्रि में स्थापित करें। इसे पूजा स्थान या पूर्व दिशा में रखें। मंत्र: “ॐ नवग्रहाय नमः” या प्रत्येक ग्रह का विशेष मंत्र। ✅ नवग्रह यंत्र स्थापना विधि (हिंदी में) नवग्रह यंत्र को सही विधि से स्थापित करने पर यह जीवन में ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम करता है और शुभ फल देता है। नीचे स्टेप-बाय-स्टेप विधि दी गई है: 1. शुभ दिन और समय स्थापना के लिए शनिवार, नवरात्रि, अमावस्या, या शुभ मुहूर्त चुनें। प्रातः काल (सूर्योदय के बाद) सबसे उत्तम माना जाता है। 2. आवश्यक सामग्री नवग्रह यंत्र गंगाजल लाल या पीला कपड़ा चंदन का लेप रोली (कुमकुम) अक्षत (चावल) नौ अलग-अलग रंग के फूल दीपक, अगरबत्ती मिठाई या फल का भोग 3. यंत्र की शुद्धि यंत्र को गंगाजल या कच्चे दूध से धोकर शुद्ध करें। साफ कपड़े से पोंछकर लाल या पीले कपड़े पर रखें। 4. सही स्थान यंत्र को पूजा स्थान या पूर्व दिशा (East Direction) में रखें। स्थान हमेशा स्वच्छ और पवित्र हो। 5. पूजन विधि दीपक और अगरबत्ती जलाएं। यंत्र को चंदन, रोली, अक्षत और नौ अलग-अलग फूल अर्पित करें। प्रत्येक ग्रह के लिए अलग-अलग मंत्र का जाप करें या सामान्य मंत्र: “ॐ नवग्रहाय नमः” (कम से कम 11 बार)। 6. मंत्र जाप (प्रत्येक ग्रह के लिए) सूर्य: ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः चंद्र: ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः मंगल: ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः बुध: ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः गुरु: ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः शुक्र: ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः शनि: ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः राहु: ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः केतु: ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः (प्रत्येक मंत्र कम से कम 11 बार जाप करें)। 7. नियम यंत्र को रोजाना या हर शनिवार धूप-दीप दिखाएं। जगह हमेशा साफ रखें। यंत्र को उल्टा या गंदा न होने दें।
Yantra