Mahamrtyunjay Yantra on Bhojpatra 6*6 inch Siddh Abhimantrit
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Description महामृत्युंजय यंत्र के लाभ (Benefits of Maha Mrityunjaya Yantra): महामृत्युंजय यंत्र भगवान शिव के महामृत्युंजय स्वरूप का प्रतीक है। यह यंत्र जीवन की रक्षा, आयु वृद्धि और नकारात्मक ऊर्जा से बचाने के लिए अत्यंत प्रभावी माना जाता है। इसके प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं: ✅ 1. आयु वृद्धि और स्वास्थ्य लाभ यह यंत्र असमय मृत्यु के भय को दूर करता है। गंभीर रोगों और लंबी बीमारी से सुरक्षा प्रदान करता है। ✅ 2. नकारात्मक शक्तियों से रक्षा बुरी नज़र, तंत्र-मंत्र और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। घर और परिवार को अशुभ प्रभावों से बचाता है। ✅ 3. दुर्घटनाओं से सुरक्षा वाहन दुर्घटना, आकस्मिक घटनाओं और आपदाओं से बचाव में मदद करता है। ✅ 4. मानसिक शांति चिंता, भय और मानसिक तनाव को कम करता है। आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच बढ़ाता है। ✅ 5. आध्यात्मिक लाभ शिव कृपा प्राप्त होती है। ध्यान और साधना में सहायक। ✅ 6. परिवार की सुरक्षा परिवार के सदस्यों की रक्षा करता है और घर में शांति बनाए रखता है। सुझाव: महामृत्युंजय यंत्र को सोमवार, महाशिवरात्रि या किसी शुभ मुहूर्त में स्थापित करें। मंत्र: “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥” (कम से कम 11 बार जपें)। ✅ महामृत्युंजय यंत्र स्थापना विधि (हिंदी में) महामृत्युंजय यंत्र को सही विधि से स्थापित करने पर यह जीवन, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए अत्यधिक प्रभावी माना जाता है। यहाँ स्टेप-बाय-स्टेप विधि दी गई है: 1. शुभ दिन और समय सोमवार, महाशिवरात्रि, या किसी शुभ मुहूर्त में स्थापना करें। प्रातः काल (सूर्योदय के बाद) सर्वोत्तम समय है। 2. आवश्यक सामग्री महामृत्युंजय यंत्र गंगाजल या शुद्ध जल लाल या पीला कपड़ा चंदन का लेप रोली (कुमकुम) अक्षत (चावल) बेलपत्र, धतूरा या सफेद फूल दीपक, अगरबत्ती फल या मिठाई का भोग 3. यंत्र की शुद्धि यंत्र को गंगाजल, फिर कच्चे दूध से धोकर शुद्ध करें। साफ सूती कपड़े से पोंछ लें और लाल या पीले कपड़े पर रखें। 4. सही स्थान इसे पूजा स्थान, ब्रह्मस्थान (घर का मध्य भाग) या उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में रखें। सुनिश्चित करें कि जगह साफ और पवित्र हो। 5. पूजन विधि दीपक और अगरबत्ती जलाएं। यंत्र को चंदन, रोली, अक्षत, बेलपत्र और फूल अर्पित करें। शिवलिंग या भगवान शिव की मूर्ति के सामने रखें तो और शुभ। 6. मंत्र जाप कम से कम 11 बार महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें, अधिकतम 108 बार करें: “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥” 7. नियम प्रतिदिन सुबह या सोमवार को धूप-दीप दिखाएं। मन से प्रार्थना करें कि घर-परिवार स्वस्थ और सुरक्षित रहे।
Yantra