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Bharangi ki jad (Guru Grah ke liye)

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Description भारंगी जड़ (Bharangi Jad) Jupiter Planet (गुरु ग्रह) Bharangi Root भारंगी की जड़ को धारण करने से गुरु ग्रह का दोष दूर होता है। बृहस्पति ग्रह के नकारात्मक प्रभावों से बचने तथा मानसिक शांति और आध्यात्मिक ज्ञान पाने के लिए यह जड़ी वरदान हैं। हिन्दू ज्योतिष के अनुसार बृहस्पति ग्रह गुरु, ज्ञान एवं सद्गुणों का कारक होता है। इस दिव्य जड़ी को धारण करने से जातक के स्वभाव में मानवीय प्रेम, धार्मिक एवं आध्यात्मिक ज्ञान की वृद्धि होने लगती है। वैवाहिक जीवन में सुख शांति लाने एवं संतान प्राप्ति के लिए भी भारंगी की जड़ को धारण किया जाता है। जिन छात्रों का ध्यान पढ़ाई में नहीं लगता है, उनके लिए भी यह जड़ विशेष लाभकारी है। भारंगी की जड़ को तुसोदक के साथ पीसकर वंक्षण हर्निया के इलाज में दिया जाता है भारंगी की जड़ के कई और फ़ायदे हैं जैसे कि मूत्र विकारों में फ़ायदेमंद, नेत्र रोगों में लाभदायक, मुंह संबंधी बीमारियों में फ़ायदेमंद, पसलियों के दर्द में फ़ायदेमंद, राजयक्ष्मा या टीबी के इलाज में फ़ायदेमंद, अतिसार या दस्त को रोकने में फ़ायदेमंद, पित्तज-शोध के इलाज में फ़ायदेमंद, योनि व्यापद के उपचार में फ़ायदेमंद, संधिशोध या गठिया में फ़ायदेमंद। बृहस्पति के दुष्प्रभावों को कम करना, यकृत विकार, मोच, चेचक, एलर्जी और जठरांत्र संबंधी विकार आदि रोगों का इलाज में। धारण विधि – गुरुवार के दिन जड़ी को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम गुरु मंत्र (“ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ को पीले वस्त्र में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा कसकर बाँध लें। भारंगी जड़ (Bharangi Jad Root) एक शक्तिशाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जिसका उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में किया जाता है। यह न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, बल्कि इसके ज्योतिषीय लाभ भी बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। भारंगी जड़ का उपयोग विभिन्न प्रकार के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रोगों के उपचार में किया जाता है। इसके अलावा, यह कई ज्योतिषीय दोषों को दूर करने में भी सहायक है। आइए जानते हैं भारंगी जड़ के सामान्य और ज्योतिषीय लाभों के बारे में विस्तार से। भारंगी जड़ के सामान्य लाभ 1. सांस संबंधी समस्याओं का उपचार भारंगी जड़ का उपयोग मुख्य रूप से श्वसन तंत्र को मजबूत करने के लिए किया जाता है। यह कफ और अन्य श्वसन संबंधित समस्याओं को कम करने में मदद करता है। यह अस्थमा, खांसी, सर्दी-जुकाम, और ब्रोंकाइटिस जैसी समस्याओं में लाभकारी है। इसके नियमित सेवन से श्वसन तंत्र साफ रहता है और सांस की दिक्कतें कम होती हैं। 2. पाचन तंत्र को सुधारना भारंगी जड़ पाचन तंत्र के लिए भी लाभकारी मानी जाती है। यह अपच, पेट फूलना, गैस, कब्ज जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद करती है। यह पाचन प्रक्रिया को गति देती है और आंतों में रक्त संचार को बढ़ाकर पाचन में सुधार करती है। 3. तंत्रिका तंत्र को मजबूत करना भारंगी जड़ मानसिक तनाव, चिंता, और अवसाद को कम करने में मदद करती है। यह तंत्रिका तंत्र को शांत और मजबूत बनाती है, जिससे मानसिक स्थिति बेहतर रहती है। इसके सेवन से मानसिक स्पष्टता बढ़ती है और मानसिक थकावट को कम किया जा सकता है। 4. त्वचा रोगों का उपचार यह जड़ त्वचा की समस्याओं को भी ठीक करने में मदद करती है, जैसे मुंहासे, सोरायसिस, और अन्य प्रकार के त्वचा संक्रमण। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण त्वचा को राहत पहुंचाते हैं और जलन को कम करते हैं। आप इसका लेप बनाकर त्वचा पर लगा सकते हैं। 5. प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करना भारंगी जड़ शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में सहायक होती है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करती है, जिससे शरीर की रोग प्रतिकारक क्षमता बढ़ती है और बीमारियों से बचाव होता है। 6. दिल और रक्त परिसंचरण के लिए लाभकारी यह जड़ रक्त परिसंचरण को सुधारने और रक्तदाब को नियंत्रित करने में मदद करती है। यह हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है और रक्त वाहिकाओं को स्वस्थ रखती है। यह रक्त शुद्धिकरण में भी सहायक है, जिससे खून में से विषैले तत्व बाहर निकलते हैं। 7. मूत्रवर्धक गुण भारंगी जड़ मूत्र प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए भी प्रयोग की जाती है। यह मूत्राशय में संक्रमण को रोकने, मूत्र प्रवाह को बढ़ाने और गुर्दे की सेहत को बनाए रखने में मदद करती है। 8. स्ट्रोक और लकवा के उपचार में सहायक यह जड़ स्ट्रोक या लकवा के बाद हुए तंत्रिका क्षति की मरम्मत में सहायक होती है। यह शरीर के कमजोर हिस्सों में ताकत और लचीलापन बढ़ाती है और शरीर की गति को सुधारने में मदद करती है। ज्योतिषीय लाभ भारंगी जड़ का उपयोग ज्योतिष में भी विभिन्न ग्रहों और दोषों को संतुलित करने के लिए किया जाता है। यह खासतौर पर कुंडली में आने वाली परेशानियों को दूर करने के लिए उपयोगी मानी जाती है। 1. शनि दोष को दूर करना ज्योतिष में शनि को न्याय का ग्रह माना जाता है, लेकिन अगर शनि खराब स्थिति में हो, तो यह व्यक्ति को कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना कराता है। भारंगी जड़ का उपयोग शनि की कष्टकारी स्थिति को शांत करने के लिए किया जाता है। यह जड़ शनि के प्रभाव को कम करती है और व्यक्ति को सफलता की दिशा में अग्रसर होने में मदद करती है। 2. कुंडली में मंगल दोष का समाधान मंगल ग्रह से जुड़े दोष, जिन्हें “मंगल दोष” के नाम से जाना जाता है, शादी, परिवार और व्यक्तिगत जीवन में समस्याएँ उत्पन्न कर सकते हैं। भारंगी जड़ का उपयोग इन दोषों को दूर करने के लिए किया जाता है। यह मंगल के प्रभाव को शांत करता है और विवाह में आ रही समस्याओं का समाधान करता है। 3. राहु और केतु के नकारात्मक प्रभाव को कम करना राहु और केतु के प्रभाव से जीवन में अशांति और अनिश्चितता आती है। इन ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव को संतुलित करने के लिए भारंगी जड़ का उपयोग किया जाता है। यह दोनों ग्रहों के अशुभ प्रभावों को कम करने में मदद करती है, जिससे जीवन में स्थिरता और सफलता आती है। 4. आध्यात्मिक उन्नति भारंगी जड़ मानसिक शांति, ध्यान, और आत्मज्ञान को बढ़ावा देती है। इसका उपयोग विशेष रूप से उन लोगों के लिए किया जाता है जो ध्यान और साधना के माध्यम से आध्यात्मिक उन्नति चाहते हैं। यह जड़ मानसिक और आत्मिक शांति प्राप्त करने में सहायक होती है। 5. भाग्य और समृद्धि में वृद्धि भारंगी जड़ का उपयोग भाग्य को सुधारने और समृद्धि बढ़ाने के लिए भी किया जाता है। यह जड़ वित्तीय समस्याओं को दूर करती है और व्यक्ति को धन और सफलता की ओर अग्रसर करती है। इसके प्रभाव से व्यक्ति की जीवनशक्ति और भाग्य में सुधार होता है। 6. व्यक्तित्व में सुधार ज्योतिष के अनुसार, भारंगी जड़ का उपयोग व्यक्ति के व्यक्तित्व को सुधारने और उसे अधिक आकर्षक बनाने में भी मदद करता है। यह जड़ आत्मविश्वास को बढ़ाती है और समाज में उच्च स्थान प्राप्त करने में सहायक होती है। भारंगी जड़ का उपयोग कैसे करें? चाय या काढ़े के रूप में: भारंगी जड़ को पानी में उबालकर काढ़ा तैयार किया जा सकता है। इसे रोजाना सुबह या शाम पीने से पाचन तंत्र को बेहतर बनाने और स्वास्थ्य को लाभ मिलता है। चूर्ण के रूप में: आप भारंगी जड़ का चूर्ण भी बना सकते हैं और इसे शहद या पानी के साथ सेवन कर सकते हैं। यह त्वचा और रक्त शुद्धिकरण के लिए उपयोगी होता है। लेप के रूप में: त्वचा रोगों के लिए, भारंगी जड़ का पेस्ट बना कर प्रभावित जगह पर लगाया जा सकता है। माला के रूप में: ज्योतिष में, इसे माला में पहनकर या घर में रखने से शनि, मंगल, और राहु के प्रभावों को शांत करने में मदद मिलती है।
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